मुकुट

“कितना सुंदर राजमुकुट है अपने राजा का!”
“हाँ, वो तो है. सारे जगत में इससे भव्य राजमुकुट और किसी देश का नहीं है.”
“किलो भर सोना होगा, नहीं? हीरे-जवाहरात भी बहुत हैं. मोती-माणिक भी.”
“और क्या? विदेशी कारीगरों से बनवाया है. हमारे देश की शान है ये मुकुट.”
“सुरक्षा भी होगी तगड़ी.”
“हाँ, हमारी सेना की सबसे बहादुर टुकड़ी सिर्फ मुकुट की सुरक्षा के लिए ही बनायी गयी है. और रखरखाव के लिये दर्जन भर कर्मचारी हैं. और इन सब की पोशाक बाकी सेना-पुलिस से अलग होती है.”

उसने मेरी तरफ चाय की प्याली बढ़ाई. चाय की चुस्कियाँ लेते हुए मैं बाहर देखने लगा.

“बारिश का पानी कितना जम गया है.”
“हाँ. मुन्सिपाल्टी से कोई देखने भी नहीं आ रहा. कहते हैं बजट बनाते समय इसकी आशंसा नहीं थी. खर्चा बहुत ज़्यादा हो गया है इस साल.”
“लोग बीमार भी पड़ रहे होंगे.”
“हाँ. सामने की बस्ती में चार लड़के मरे कल. कह रहे हैं शायद हैज़ा है.”
“इलाज नहीं करवाया था?”
“अस्पताल गये थे.”
“फिर?”
“अरे अस्पताल में दवाइयाँ कहाँ होती हैं इतने लोगों के लिये? देश का बजट तो देखा है तुमने, रक्षा में इतना खर्च हो रहा है, स्वास्थ्य के लिए कुछ बचा ही नहीं.”
“हाँ ऐसा पड़ोसी भगवान किसी देश को न दे. पर, दवाइयाँ तो प्राइवेट दुकान से ला सकते थे.”
“अरे भाई अस्पताल वालों ने भी तो मना कर दिया उन्हें अस्पताल में लेने से.”
“क्यों? वहाँ तो फीस भी बहुत कम है.”
“ऊपर से देने को कुछ था नहीं इन बेचारों के पास.”
“रिश्वत?”
“हाँ.”

चाय खत्म हो चुकी थी. बारिश फिर शुरू हो गई. टीवी का कैमरा फिर राजा पर केन्द्रित हो गया. राजा बड़े शान से विश्वविद्यालय से मानद डाक्टरेट की उपाधि ग्रहण कर रहे थे. उपाधि देने के बाद कुलाधिपति ने नतमस्तक होकर राजा को सलाम किया. फिर उन्होंने राजा की तारीफों के पुल बाँधे.

पत्रकारों ने राजा की महानता से सम्बद्ध सवाल किये, और इसी बहाने उनका गुणगान किया. पीछे बैठे एक पत्रकार ने पूछा – “हमारे देश के अभागाबाद में पिछले महीने बारिश से सारे रास्ते बंद हो गये, कारबार ठप्प हो गया, बस्तियाँ पानी में डूबी रहीं, कई लोग बीमार पड़े और मर गये, और किसी अस्पताल में गरीब बीमारों को दाखिला नहीं मिला. राजा या कोई अफसर एक बार भी वहाँ का हाल जानने नहीं गये…”

उसकी बात पूरी न हो पायी थी कि छः सिपाही आये और उसे घसीटते हुए वहाँ से बाहर ले गये.

कार्यक्रम जारी रहा. कुलाधिपति ने राजा से माफी माँगी और कहा कि ये ज़रूर पड़ोसी देश का कोई एजेण्ट होगा जो जनता को हमारे स्वर्णिम राज के खिलाफ भड़काना चाहता है. आधे घण्टे बाद टीवी समाचार में इस तथ्य की पुष्टि की गयी कि वो पत्रकार के भेस में वाकई पड़ोसी देश का एक आतंकवादी ही है.

“अपने अभागाबाद की कोई खबर नहीं दिखाते टीवी में?”
“अरे इससे ज़्यादा महत्त्वपूर्ण खबरें हैं, और कौन आएगा इस हालत में इसे कवर करने? पता भी है राजधानी कितनी दूर है यहाँ से?”

टीवी पर एक फिल्मी हिरोइन के कुत्ते के प्रेम प्रसंग पर ब्रेकिंग न्यूज़ आ रही थी.

थोड़ी देर हम चुपचाप बारिश को देखते रहे. बिजली चली गयी. टीवी की आवाज़ आनी बंद हो गई. बारिश और तेज़ हो गई. दूर बस्ती से किसी माँ के ज़ोर-ज़ोर से रोने की आवाज़ आने लगी. फिर कोई बच्चा बारिश और हैज़े की भेंट हो गया.

वैसे ही जड़ बैठे रहे हम दोनों. मैं अपने घर के लिए निकलने की सोच ही रहा था, कि वह अचानक उठ खड़ा हुआ.

“हम ऐसे कैसे हो सकते हैं? हमारी आँखों के सामने ये अनर्थ होता है, बहाने दिये जाते हैं कि बजट नहीं है. लेकिन राजा की विदेश यात्रा के लिए कोष में धन है. यहाँ बच्चों की जानें जा रही हैं उसकी किसी को परवाह नहीं, पर उस निर्जीव मुकुट के यत्न में कोई कमी नहीं आती कभी.”

मैं भौंचक्का उसे देख रहा था. अभी घंटे भर पहले वही इस राज और मुकुट की वंदना करते नहीं थक रहा था.

“पर ये तो हमारा गौरव चिह्न है. दुनिया के किसी देश में इतना भव्य मुकुट नहीं मिलेगा.”

“दुनिया के किसी देश में हमारे जैसी भुखमरी, भ्रष्टाचार और सरकारी आतंक भी तो नहीं मिलेगा. ऐसा मुकुट का क्या गौरव, जब देश की हालत पे शर्म आती हो? मैं तो… ”

वह अपनी बात पूरी नहीं कर पाया था, कि अचानक मकान का दरवाज़ा टूटा. धूल का गुबार छँटा तो देखा, एक सैन्य टुकड़ी खड़ी है. वही विशिष्ट पोशाक पहने.

“हम राजमुकुट रक्षा दल हैं. तुम्हें राजद्रोह, और देश के गौरव चिह्न हमारे राजमुकुट के खिलाफ बग़ावत के जुर्म में गिरफ्तार किया जाता है.”

“पर हमने तो कुछ किया भी नहीं.”

“सोचा, यही क्या कम है? और सोचने वालों से ही तो हमारे राज को ख़तरा है.”

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